NARAYAN TEL

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नारायण तेल

घटकद्रव्यः अश्वगंधा, खरेटी की जडी, बेल की जड, छोटी कटेरी, गोखर!, संभालु

की पत्ती, सोनापाठा के मुल, पुर्णनवा के मुल, उडद, कटरसैया एरंड मुल, देवदार!,

प्रसारणी और अरणी, कुठ, छोटी ईलायची, सप!ेद चंदन, खरेटी मुल, जटामारसी,

छरीला, सेंधा नमक, असगंध, बच, रासना, सौंप! सरिवन, पिठवन, माष्परणी,

मृद्गणपर्णी, तगर, शतावरी रस, गाय का दुध 1 तिल तेल फण्ण्

उपयोगः लकवा, पक्षाघात, आदि वायु के कारण शरीर का एक भाग सुख जाता है।

वहा रक्त का संचार न होने के कारण वह भाग शुन्य और पतला हो जाता है।

एैसी स्थिती मे नारायण तेल की मालीश से बहुत लाभ होता है। पक्षाघात, मन्यास्तंभ,

कमर का दर्द पसली का दर्द , कान का दर्द, लंगडापन, एकांग या सर्वांग

वात में ज्यादा दर्द में सुबह शाम नारायण तेल लगाकर सेक ले। पुराने

वात रोगों में उस तेल की मालीश से लाभ होता है।

उपयोग विधीःनारायण तेल दर्द वाले हिस्सेपर लगाकर सेंक ले।

Last modified on Friday, 21 August 2017 13:40
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